छत्तीसगढ़ की पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा
आभा किषोरी खलखो1, डाॅ. डी.एन.वर्मा2
1षोधार्थी, अर्थषास्त्र अध्ययनषाला, पं. रविषंकर षुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़
2प्राचार्य, शासकीय नार्गाजुन स्नातकोतर विज्ञान महाविद्यालय, रायपुर छतीसगढ़
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शोध सारांश:
कोरवा जनजाति आधुनिक सभ्यता से दूर घने जंगलों, मरूस्थलों एंव दुर्गम पर्वतों में निवासरत है। जनजातियां हमारी सभ्यता के वे अंग है जो विकास की प्रक्रिया में पिछड़ गये है। और अपने विचारों एंव जीवन पध्दति में हमारे विेकास की प्रक्रिया छुपाये हुये है। देष की कुल अनुसूजित जनजातियो का 8.4 प्रतिषत जनसंख्या छत्तीसगढ़ में निवासरत है, छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बाहुल्य राज्य है। राज्य की कुल अनुसूचित जनजातियों का 30.62 प्रतिषत जनजातीयों की है, देष में कुल 75 विषेष पिछड़ी जनजातीय समूह है। जिसमें से 7 पिछड़ी जनजाति छत्तीसगढ राज्य में निवास करती है, इन्ही जनजातीयों मेें से एक है पहाड़ी कोरवा। छत्तीसगढ़ में पिछड़ी जनजाति की कुल जनसंख्या 3,10,625 है जिसमें केवल पहाड़ी कोरवा जनजाति की कुल जनसंख्या 1,29,429 है, छत्तीसगढ़ में पहाड़ी कोरवा जषपुर, सरगुजा, बलरामपुर, कोरबा एंव रायगढ़ जिलों में मुख्य रूप से पाई जाति है।
ज्ञम्ल्ॅव्त्क्ैरू साक्षरता, पहाड़ी कोरवा छत्तीसगढ़ ।
प्रस्तावनाः
छत्तीसगढ़ राज्य एक आदिवासी बहुल राज्य है, भारत में कुल अनुसूचित जनजातियों का 8.4 प्रतिषत जनसंख्या छत्तीसगढ़ में निवासरत है। यहाँ प्रदेष की कुल जनसंख्या का 30.62 प्रतिषत अनुसूचित जनजातियों का है, मध्यप्रदेष, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात, और झारखण्ड के बाद छत्तीसगढ़ का जनजातियों की जनसंख्या के आधार पर छठवें स्थान पर है।
जबकि कुल जनसंख्या का प्रतिषत के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य का मिजोरम, नागालैण्ड, मेघालय और अरूणाचल प्रदेष के बाद पांचवे स्थान पर है। जिसमें जनसंख्या का कुछ भाग मैदानी ग्रामों से दूर घने जंगलों, पहाड़ियों, घाटियों, तटीय क्षेत्रों में निवासरत है। पिछले 50 वर्षो के दौरान भारत की जनजातीय आबादी के आर्थिक, सामाजिक, और जनसंाख्यिकीय विषेषताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, फिर भी अभी भी एक मजबूूत अंतर-क्षेत्रीय जनसांख्यकीय असमानता मौजूद है। भारत सरकार तथा योजना आयोग के विषेषज्ञों द्वारा देष के अनुसूचित जनजाति समूहों में से 75 जनजाति को विषेष पिछड़ी जनजाति के रूप में है, जिसमें भारत में कुल 17 राज्यों तथा 01 केन्द्र शासित प्रदषों में पाई जाती है। जनजातीय जनसंख्या का अधिकतर हिस्सा पूर्व-उत्तर राज्यों में केन्द्रित है, और सबसे कम जनजातियां दक्षिण भारत में पाई जाती है। छत्तीसगढ़ राज्य में 42 अनुसूचित जनजाति पाई जाती है इनमें मुख्य रूप से 07 जनजातियों को विषेष पिछड़ी जनजाति के रूप में घोषित किया गया है। छत्तीसगढ़ में पहाड़ी कोरवा मुख्य रूप से जषपुर, सरगुजा, बलरामपुर, कोरबा, एंव रायगढ़ जिलों में पाई जाती है।
पिछड़ी जनजाति
जनजाति शब्द लैटिन से ली गई है, जिसका अर्थ है-गरीब या जनता। जनजातियों को गरीबों का मूल कहा जाता है, जनजातियों के बीच गरीबी ,खराब स्वास्थ्य, स्वच्छता, निरक्षरता और अन्य सामाजिक समस्याएं भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक प्रभावषाली प्रभाव डाल रही है। गैर-जनजातीय लोगों को राज्य सरकार की अनुमति के बिना जनजातीय समूहों में प्रवेष करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। यह प्रणाली जनजातियों को पृथकीकरण का अवसर देता है, हमारे देष में अन्य जातीय समूहों की तुलना में जनजाति पिछड़ी और अधिक शोषित होती है। जनजातीय क्षेत्रों में संचार के साधन कम है, उचित पेयजल की कमी, निरक्षरता, अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं प्रमुख समस्याएं है। भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित मापदण्डों के आधार पर अनुसूचित जनजाति समुदाय को विषेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा दिया गया है-
1) आस्तित्व के पूर्व कृषि की अर्थव्यवस्था (षिकार, वनोपज संग्रह पर आश्रित जनजाति समूह)
2) स्थाई या गिरावट आबादी
3) बेहद कम साक्षरता
4) पृथकीकरण या एकांत क्षेत्रों में निवास करना।
उदद्ेष्य - पहाड़ी कोरवा जनजाति की साक्षरता की स्थिति को जानना।
षोध प्रविधि -
प्रस्तुत शोध पत्र द्वितीयक समंको पर आधारित है, इसमें शोध साहित्य, पत्र-पत्रिकाएं, पुस्तकें इसके अतिरिक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग रायपुर तथा इंटरनेट से लिया गया है।
छत्तीसगढ़ की विषेष पिछड़ी जनजाति -
1) बैगा
2) कमार
3) पहाड़ी कोरवा
4) अबुझमाड़िया
5) बिरहोर
6) पाण्डो
7) भुंजिया ।
पिछड़ी जनजाति और साक्षरता -
किसी भी समाज के विकास के लिए षिक्षा एक महत्वपूर्ण कारक है, षिक्षा के विकास से ही समाज का विकास सम्भव है। इस दृष्टि से पहाड़ी कोरवा जनजाति में साक्षरता दर काफी कम है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य की कुल साक्षरता दर 71.04 प्रतिषत है, की तुलना में प्रदेष में निवासरत पहाड़ी कोरवा जनजाति की साक्षरता दर मात्र 38.7 प्रतिषत है। साक्षरता के अनुसार महिलाओं की स्थिति और भी दयनीय है जिसमें महिला साक्षरता 29.5 प्रतिषत है। षिक्षा एक राष्ट्र के विकास को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में से एक है, एक राष्ट्र की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति अपने नागरिकों के षिक्षा विकास द्वारा निर्धारित की जाती है। षिक्षा हमें अपने आस-पास के पूरे विष्व को जानने में सक्षम बनाता है, आधुनिक षिक्षा स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता, मानवधिकार, लोकतंत्र और बैज्ञानिक दुनिया के दृष्टिकोण जैसे विषयों पर जोर देती है। जनजातीय क्षेत्रों में षिक्षा के विस्तार को मुख्य रूप से इनमें अन्धविष्वास, गरीबी, व अन्य सुविधाओ की कमी षिक्षा को प्रभावित करते है। अषिक्षा जनजाति समूह के विकास में एक प्रमुख बाधा है, हमारे देष की सफलता षिक्षा पर आधारित है।
सारणी
वर्ष पहाड़ी कोरवा जनसंख्या की साक्षरता (ः में)
पुरूष म्हिला कुल साक्षरता
2001 29.53 17.27 23.39
2006 28.10 21.17 24.37
2011 47.0 29.5 38.7
स्तोत्ररू. छत्तीसगढ़ के पहाड़ी कोरवाओं की सामाजिक व आर्थिक दषा एंव छत्तीसगढ़ की जनजातियां, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी
तालिका से स्पष्ट होता है कि पहाड़ी कोरवा जनजाति की साक्षरता वर्ष 2001 में कुल 23.39 प्रतिषत, जिसमें 29.53 प्रतिषत पुरूष और 17.27 प्रतिषत महिला साक्षरता है। अर्थात् यह अत्यन्त ही कम है, लेकिन बाद के वर्षों में वर्ष 2006 में कुल साक्षरता का 24.37 प्रतिशत है, जिसमें 28.10 प्रतिषत पुरूष और 21.17 प्रतिषत महिला साक्षरता है। अतः इनकी साक्षरता दर में थोड़ी वृध्दि हुई है। अर्थात् शासन के विषेष प्रयास से इस समुदाय के लोगों में षिक्षा के प्रति आकर्षक बढ़ा रहा है, और वे षिक्षा के प्रति जागरूक होने लगे है। इस प्रकार वर्ष 2011 में साक्षरता दर बढ़ कर 38.7 प्रतिषत हो गई है, जिसमे 47.0 प्रतिषत पुरूष और 29.5 प्रतिषत महिला साक्षरता दर है। अतः इनकी साक्षरता दर में धीरे-धीरे वृध्दि हो रही है।
निष्कर्ष -
कोरवा जनजातियों में साक्षरता स्थितियों से पता चलता है कि इन जनजातियों का निवास स्थान दुगर्म पहाड़़ी, पठारी व सघन वनीय क्षेत्र होने के कारण विकास से कोषों दूर है। समस्याओं के अंतगर्त इनमंे जीविका साधनों का अभाव रोजगार न मिलना, कृषि भूमि का अभाव, आवास की समस्या, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, पेयजल की कमी, षिक्षा का अभाव, अन्धविष्वास, यातायात मार्गों की असुविधा इत्यादि है।
संदर्भ ग्रंथ -
1. शर्मा, ताराय आधुनिक विकास से कोषो दूर विषेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा, शोध उपक्रम अंक-15 अप्रैल 2003
2. मौर्या, नूतनय विकास की अवधारणा और जनजातियों का स्वास्थ्य, योजना जनवरी 2014 पृ.सं. 38-41
3. छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रषासन पर राज्यपाल का प्रतिवेदन वर्ष 2015-16, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग रायपुर (छ.ग.)
4. श्रीवास्तव, महेषय छत्तीसगढ़ के पहाड़ी कोरवाओं की सामाजिक व आर्थिक दषा, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी, रायपुर
5. वैष्णव, टी.के.य छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी, रायपुर।
Received on 26.07.2018 Modified on 16.08.2018
Accepted on 01.09.2018 © A&V Publications All right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2018; 6(4): 518-520.